`अच्छे गुलाम (बंदे) की सिफ़त अपनाओ`
इमाम इब्न अल-जौज़ी (रहमतुल्लाही अलैहि) फ़रमाते हैं:
"मैंने एक बूढ़ी औरत को देखा कि वह ज़ुहर की अज़ान से पहले ही वज़ू कर रही थी। मुझसे रहा न गया तो मैंने उससे पूछ लिया: 'क्या ज़ुहर की अज़ान हो गई है?'
उस बूढ़ी महिला ने जवाब दिया:
'أنا أذهب إليه قبل أن يناديني'
(मैं उसकी [अल्लाह की] तरफ उसके बुलावे से पहले ही चली जाती हूँ।)"
इमाम इब्न अल-जौज़ी (रहमतुल्लाही अलैहि) कहते हैं: "इसके बाद मैंने जान लिया कि मैं एक बुरा बंदा हूँ।"
महान मुअद्दिथ इमाम सुफ़ियान बिन उयैना (रहमतुल्लाही अलैहि) फ़रमाते हैं:
"तुम बुरे ग़ुलाम की तरह न बनो कि वह बुलाने पर ही आता है।"
- अल-तब्सिराह लिल-इमाम इब्न अल-जौज़ी; पृ. 131