कुरान की आयत

لَّا یَمَسُّهٗۤ اِلَّا الْمُطَهَّرُوْنَؕ(۷۹)(سورۃ الواقعہ)
अनुवाद
इसको वही लोग छूते हैं जो ख़ूब पाक हैं। (७९)(आसान तर्जुमा-तुल-क़ुरआन) यानी: राजेह तफ़्सीर के मुताबिक़ इससे मुराद फ़रिश्ते हैं, और काफ़िरों के इस इश्काल का जवाब दिया जा रहा है कि हम यह कैसे यक़ीन कर लें कि अल्लाह तआला का कलाम किसी कमी ज़्यादती के बग़ैर अपनी असली सूरत में हमारे पास पहुँच रहा है और किसी शैतान वग़ैरह ने इसमें कोई तसर्रुफ़ नहीं किया? इसका यह जवाब दिया गया है कि क़ुरआन करीम लौहे महफ़ूज़ में दर्ज है और इसे पाक फ़रिश्तों के सिवा कोई और छू भी नहीं सकता, अगरचे यहाँ ख़ूब पाक से मुराद फ़रिश्ते हैं, लेकिन इसमें एक इशारा इस तरफ़ भी मालूम होता है कि जिस तरह आलमे बाला में पाक फ़रिश्ते ही इसे छूते हैं, उसी तरह दुनिया में भी उन्हीं लोगों को छूना चाहिए जो पाक हालत में हों, चुनाँचे अहादीस में क़ुरआन करीम को बग़ैर वज़ू के छूने से ममानअत आई है।(आसान तर्जुमा-तुल-क़ुरआन)
इमाम अबू नस्र सिंधी (रह.) का हिकमत भरा जवाब
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इमाम अबू नस्र सिंधी (रह.) का हिकमत भरा जवाब

इमाम अबू नस्र फ़तह बिन अब्दुल्लाह सिंधी (रहमतुल्लाही अलैहि) दूसरी सदी हिजरी के उन उलेमा (विद्वानों) में से हैं जो सिंधी मूल के थे, और सिंध में मुसलमानों के प्रवेश के बाद इस्लाम से सम्मानित हुए थे। मुसलमान होने के बाद वे तफ़सीर, हदीस, फ़िक़्ह और कलाम के प्रामाणिक विद्वान माने गए। अल्लामा समआनी (रह.)...

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