وَ بَشِّرِ الْمُؤْمِنِیْنَ بِاَنَّ لَهُمْ مِّنَ اللّٰهِ فَضْلًا كَبِیْرًا(۴۷)وَ لَا تُطِعِ الْكٰفِرِیْنَ وَ الْمُنٰفِقِیْنَ وَ دَعْ اَذٰىهُمْ وَ تَوَكَّلْ عَلَى اللّٰهِ وَ كَفٰى بِاللّٰهِ وَكِیْلًا(۴۸)(سورۃ الاحزاب)
अनुवाद
तुम मोमिनों को ख़ुशख़बरी सुना दो कि उन पर अल्लाह की तरफ़ से बड़ा फ़ज़्ल होने वाला है।(४७) और काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों की बात न मानो और उनकी तरफ़ से जो तकलीफ़ पहुँचे उसकी परवाह न करो, और अल्लाह पर भरोसा रखो और अल्लाह रखवाला बनने के लिए काफ़ी है।(४८)(आसान तर्जुमा-तुल-क़ुरआन)