कुरान की आयत

أَحَسِبَ النَّاسُ أَن يُتْرَكُوا أَن يَقُوْلُوْا آمَنَّا وَهُمْ لَا يُفْتَنُوْنَ (۲)(سورۃ العنکبوت)
अनुवाद
क्या लोगों ने यह समझ रखा है कि उन्हें यूँहीं छोड़ दिया जाएगा कि बस वे यह कह दें कि: हम ईमान ले आए और उनको आज़माया न जाए? (2) (आसान तर्जुमा-उल-क़ुरआन)
पड़ोसियों का सम्मान और बेमिसाल सादगी:
लेख

पड़ोसियों का सम्मान और बेमिसाल सादगी:

हज़रत मौलाना सैयद असग़र हुसैन रहिमतुल्लाह अलैह (जो अपने मिलने वालों में हज़रत मियां साहब के नाम से मशहूर थे) दारुल उलूम देवबंद के उन उस्तादों में से थे जो शोहरत और नाम-ओ-नमूद (دکھاوے) से हमेशा कोसों दूर रहे। उन्होंने जीवन भर इस्लामी उलूम (ज्ञान) की तदरीस (शिक्षण) की सेवा की और हज़ारों छात्रों को अपन...

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