कुरान की आयत

وَ لَأَجْرُ الْآخِرَةِ خَيْرٌ لِّلَّذِينَ آمَنُوا وَ كَانُوا يَتَّقُونَ (۵۷)(سورۃ یوسف)
अनुवाद
और आख़िरत का जो अज्र है, वह उन लोगों के लिए कहीं ज़्यादा बेहतर है जो ईमान लाते और तक़्वा पर कारबंद रहते हैं(57) (आसान तर्जुमा-उल-क़ुरआन)
ऐसी नमाज़ अब कौन पढ़ेगा?
लेख

ऐसी नमाज़ अब कौन पढ़ेगा?

बयान किया जाता है कि एसाम बिन यूसुफ, हज़रत हातिम असम्म रहमतुल्लाह अलैह की मजलिस में आए और उन पर आपत्ति (ऐतराज़) करना चाहा। अतः एसाम ने हातिम से कहा: "ऐ अबू अब्दुल रहमान!" (यह हातिम की कुन्नियत है) "आप नमाज़ किस तरह अदा करते हैं?" हातिम रहमतुल्लाह अलैह ने उनकी ओर मुतवज्जोह होकर फ़रमाया: "जब नमाज़ का...

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