कि तुमने (दुनिया में) जो सब्र से काम लिया था, उसकी बदौलत अब तुम पर सलामती ही सलामती नाज़िल होगी, और (तुम्हारे) असली वतन में यह तुम्हारा बेहतरीन अंजाम है। (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन)
एक बिजली के खंभे पर एक कागज चिपका देखकर मैं करीब चला गया और उस पर लिखी तहरीर (लिखावट) पढ़ने लगा।
लिखा था.........!
"बराय-ए-करम (कृपया) ज़रूर पढ़ें।
इस रास्ते पर कल मेरा 50 रुपये का नोट खो गया है, मुझे ठीक से दिखाई नहीं देता। जिसे भी मिले, बराय-ए-करम पहुँचा दे, नवाज़िश (कृपा) होगी.................