कुरान की आयत

مَا تَسْبِقُ مِنْ اُمَّةٍ اَجَلَهَا وَ مَا یَسْتَاْخِرُوْنَ(۵)(سورۃ الحجر)
अनुवाद
कोई क़ौम अपने मुअय्यन वक़्त से न पहले हलाक होती है और न उससे आगे जा सकती है। (5) (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन)
तौहीद के दरजात (एकेश्वरवाद के चरण)
लेख

तौहीद के दरजात (एकेश्वरवाद के चरण)

मुस्निद अल-हिंद, इमाम-ए-अकबर हज़रत शाह वलीउल्लाह मुहद्दिस देहलवी ؒ ने इर्शाद फ़रमाया है कि अक़ीदा-ए-तौहीद की तकमील (पूर्णता) के लिए चार दर्जों की तौहीद का मानना लाज़िम है, अगर किसी भी दर्जे की तौहीद में ज़र्रा बराबर भी कमी रह जाएगी तो इंसान हरगिज़ मुवह्हिद (एकेश्वरवादी) नहीं कहलाया जा सकता, वे चार दर...

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