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भारत को स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली मिलेगी, सौदा 30,000 करोड़ रुपये का है।

नई दिल्ली: भारतीय सेना जल्द ही स्वदेशी रूप से विकसित त्वरित प्रतिक्रिया सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली (क्यूआरएसएएम) से लैस होगी। सूत्रों के अनुसार, रक्षा मंत्रालय चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर तैनाती के लिए इस प्रणाली की तीन रेजिमेंट खरीदने पर विचार कर रहा है। यह सौदा लगभग 30,000 करोड़ रुपये का है। क्यूआरएसएएम को जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है। त्वरित प्रतिक्रिया सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल (क्यूआरएसएएम) भारतीय सेना की वायु रक्षा प्रणाली का हिस्सा होगी। इस मिसाइल प्रणाली को मुख्य रूप से पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर तैनात किया जाएगा। जून के चौथे सप्ताह में रक्षा मंत्रालय की बैठक में इसे मंजूरी मिल सकती है, जिससे भारत की रक्षा और मजबूत होगी। क्यूआरएसएएम की विशेषताएं: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने इस प्रणाली को विकसित किया है, जो दिन हो या रात, हर स्थिति में प्रभावी है और इसका सफल परीक्षण किया जा चुका है। इस प्रणाली को आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय ताकत: 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद, भारत ने 6 और 7 मई की रात को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान के 9 ठिकानों को नष्ट किया गया। पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया, लेकिन भारतीय सेना ने एल-70 और जू-23 तोपों का इस्तेमाल किया। उन्हें वायुसेना के स्पाइडर और एस-400 सुदर्शन प्रणालियों ने नाकाम कर दिया। आगामी परियोजनाएं: भारतीय सेना को जल्द ही नए रडार, लघु दूरी की मिसाइलें, जैमर और लेजर प्रणालियां प्राप्त होने वाली हैं, जो उसे तुर्की और चीन जैसे देशों से ड्रोन के खतरों से निपटने में मदद करेंगी।