स्थान: श्रीनगर / बडगाम, जम्मू-कश्मीर
सियासी अपडेट: अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर छोड़ी पार्टी; बागी विधायकों ने भी उमर सरकार को दे रखा है 14 दिन का अल्टीमेटम
जम्मू-कश्मीर में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर मची सियासी कलह अब खुलकर सड़क पर आ गई है। एक तरफ जहां पार्टी के 25 नाराज विधायकों ने सरकार को 14 दिन का अल्टीमेटम देकर संकट बढ़ा रखा है, वहीं आज श्रीनगर से नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रभावशाली सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेंहदी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अपनी लोकसभा सदस्यता (सांसदी)—दोनों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। रुहुल्लाह के इस कदम को उमर अब्दुल्ला सरकार और नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए एक बड़े सियासी झटके के तौर पर देखा जा रहा है।
बडगाम की रैली से बड़ा ऐलान: "अनुच्छेद 370 के वादे से मुकरे उमर और फारूक"
आगा सैयद रुहुल्लाह मेंहदी ने आज बडगाम में अपने दिवंगत पिता आगा सैयद मेंहदी की 26वीं पुण्यतिथि पर आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे की घोषणा की।
नाराजगी की मुख्य वजह: रुहुल्लाह ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से अनुच्छेद 370 की बहाली को लेकर जो वादे किए थे, सत्ता में आने के बाद वे उनसे पीछे हट रहे हैं।
राजनीतिक सफर: बडगाम सीट से दो बार विधायक रह चुके रुहुल्लाह ने साल 2024 के लोकसभा चुनाव में श्रीनगर सीट से बड़ी जीत दर्ज की थी और वे पार्टी के सबसे मुखर चेहरों में गिने जाते थे।
सरकार पर संकट: 25 बागी विधायकों का 14 दिन का अल्टीमेटम
सांसद के इस्तीफे से ठीक पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस के 25 विधायकों ने बगावती तेवर अपनाते हुए रविवार को पार्टी हाईकमान को 14 दिन का अल्टीमेटम दिया था।
समर्थन वापसी की चेतावनी: बागी विधायकों ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि तय समयसीमा के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे उमर अब्दुल्ला सरकार से अपना समर्थन वापस ले लेंगे।
4 सदस्यीय डेलिगेशन का गठन: अपनी मांगों को पार्टी नेतृत्व के सामने रखने के लिए नाराज विधायकों ने 4 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल बनाया है, जिसकी अगुवाई गुरेज से विधायक नजीर अहमद गुरेजी और थानामंडी से विधायक मुजफ्फर इकबाल खान कर रहे हैं। यह दल जल्द ही फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला से मुलाकात कर अपना ज्ञापन सौंपेगा। फिलहाल विधायकों ने अल्टीमेटम के जवाब का इंतजार करने का फैसला किया है, जिसके बाद वे आगे की रणनीति तय करेंगे।
विवाद की जड़: 27 अक्टूबर का कैबिनेट विस्तार और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी
नेशनल कॉन्फ्रेंस में इस बगावत की चिंगारी 27 अक्टूबर को हुए उमर अब्दुल्ला कैबिनेट के विस्तार के बाद भड़की। मंत्रिमंडल में किए गए बदलावों से पार्टी के कई वरिष्ठ विधायक नाराज हो गए:
नए मंत्रियों की एंट्री और निर्दलीय की छुट्टी: कैबिनेट विस्तार में नेशनल कॉन्फ्रेंस के 4 विधायकों—अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कल्लू को मंत्री बनाया गया, जबकि निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को मंत्री पद से हटा दिया गया।
वरिष्ठ विधायकों में नाराजगी: इस विस्तार में नजीर अहमद गुरेजी और मुबारक गुल जैसे वरिष्ठ विधायकों को मंत्री पद नहीं मिल सका, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष फैल गया।
आधा-अधूरा डैमेज कंट्रोल: नाराजगी बढ़ने पर पार्टी प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने डैमेज कंट्रोल करते हुए मुबारक गुल को अली मोहम्मद सागर की जगह पार्टी का नया महासचिव नियुक्त कर दिया।
अनदेखी से भड़की बगावत: मुबारक गुल को तो संगठन में जगह दे दी गई, लेकिन वरिष्ठ विधायक नजीर अहमद गुरेजी को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। इसी अनदेखी से नाराज होकर गुरेजी ने बागी विधायकों को एकजुट किया और अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए हाईकमान को अल्टीमेटम दे दिया।