मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए INDIA गठबंधन ने शनिवार को 'मॉक पार्लियामेंट' आयोजित की। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का प्रस्ताव पेश किया, जो सर्वसम्मति से पास हुआ। यह एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम था, जिसकी कोई संवैधानिक वैधता नहीं है। खरगे और राहुल गांधी ने CEC पर कई गंभीर आरोप लगाए।
खरगे के प्रमुख आरोप
ज्ञानेश कुमार ने संसद की अनुमति के बिना फॉर्म-6 में बदलाव किया, जो उनके मुताबिक आपराधिक कार्य है।
चुनाव में "वोट चोरी" के साथ-साथ SIR के जरिए 13.2 करोड़ मतदाताओं को वोटर लिस्ट से बाहर कर दिया गया।
दिसंबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की सरकार ने CEC को जो आजीवन कानूनी सुरक्षा दी, उसका मकसद उनके कथित आपराधिक कार्यों को छिपाना था।
इसलिए उन्हें तुरंत पद से हटाया जाना चाहिए।
देशद्रोह के मुकदमे की मांग
खरगे ने कहा कि 'इंडिया' गठबंधन के सांसदों, जो उनके अनुसार देश की 60 प्रतिशत से ज्यादा आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, और 31 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में जुटे नागरिकों ने संकल्प लिया है कि ज्ञानेश कुमार पर संविधान के कानूनी ढांचे के अनुसार देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
"रातों-रात SIR की घोषणा"
खरगे का आरोप है कि चुनाव आयोग ने रातों-रात SIR की घोषणा कर दिया और इसे पूरे देश में लागू किया, जिसका असल मकसद भाजपा विरोधियों के वोट हटाना था। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार अपनी नाकामियां छिपाने के लिए "बाहरी लोगों और घुसपैठियों" का बहाना ले रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष घुसपैठियों को शामिल करने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि असली और वैध मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए उन्हें सूची में बनाए रखने की वकालत कर रहा है।
नोट: ये सभी बातें विपक्ष के आरोप और बयान हैं। चुनाव आयोग इस तरह के आरोपों को पहले खारिज करता रहा है।