महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में मतदाता सूचियों में कथित हेराफेरी ने लोकतंत्र के आधार स्तंभ को हिला दिया है। पूर्व एमएलसी बलराम पाटिल ने राहुल गांधी से 146 दिन पहले पनवेल निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में अनियमितताओं की ओर इशारा करते हुए चुनाव आयोग को 'भ्रष्ट' बताया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। राहुल गांधी ने भी इसी तरह के आरोप लगाते हुए भाजपा और चुनाव आयोग पर मिलीभगत का आरोप लगाया। घटनाक्रम का विवरण: किसान एवं मजदूर पार्टी के नेता बलराम पाटिल ने दावा किया कि पनवेल निर्वाचन क्षेत्र में 85,211 मतदाताओं का पंजीकरण दो या तीन बार हुआ था, जिनमें से 25,855 मतदाता एक से अधिक बूथों पर पंजीकृत थे। उन्होंने अरुण, ऐरोली और बेलापुर के पड़ोसी निर्वाचन क्षेत्रों में भी 15,800 से अधिक मतदाताओं के नाम दोहराए जाने का पता लगाया। पाटिल ने सितंबर 2024 में बॉम्बे उच्च न्यायालय का रुख किया, लेकिन चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद उनकी याचिका खारिज कर दी गई। उन्होंने दावा किया कि अकेले पनवेल में 11,628 वोटों का दोहराव हुआ है, जो लोकतंत्र के लिए 'खतरनाक' है। राहुल गांधी ने 3 फरवरी, 2025 को संसद में कहा कि महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच 70 लाख नए वोट डाले गए। मतदाताओं की संख्या हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या के बराबर थी। उन्होंने अगस्त 2025 में बेंगलुरु सेंट्रल के महादेवपुरा निर्वाचन क्षेत्र में 1,00,250 फर्जी वोटों का आरोप लगाया, जहां 80 मतदाता एक ही पते पर पंजीकृत थे और शकुन रानी नाम की एक महिला ने दो बार मतदान किया था। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को "बेबुनियाद" बताया और राहुल को हलफनामा दाखिल करने या माफी मांगने को कहा, लेकिन राहुल ने इससे इनकार कर दिया। पाटिल ने चुनाव आयोग, पनवेल के उप-विभागीय अधिकारी और रायगढ़ के जिला मजिस्ट्रेट को पत्र लिखे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने 574 में से 490 बूथों के आंकड़ों का विश्लेषण किया है और बाकी पर काम जारी है। वह अवमानना का मामला दर्ज करने पर विचार कर रहे हैं। शिवसेना के एक विधायक (एकनाथ शिंदे) ने भी मुक्ताई नगर निर्वाचन क्षेत्र में इसी तरह की शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। ममता बनर्जी समेत विपक्षी नेताओं ने भी मतदाता सूचियों में अनियमितताओं की ओर इशारा किया है। ममता ने फरवरी 2025 में कहा था कि बंगाल की मतदाता सूचियों में उत्तर प्रदेश, हरियाणा और अन्य राज्यों के मतदाता शामिल थे। चुनाव आयोग ने आरोपों का खंडन किया, लेकिन राज्य में जनता का विश्वास कम हो गया है। सीएसडीएस सर्वेक्षण से स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग पर अविश्वास 11% से बढ़कर 31% हो गया है। प्रतिक्रिया और विश्लेषण: विशेषज्ञों का कहना है कि मतदाता सूचियों के सत्यापन में बड़े पैमाने पर बदलाव सामान्य बात है, लेकिन पारदर्शिता की कमी ने संदेह पैदा कर दिया है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी ने कहा कि 2008 में कर्नाटक में 52 लाख मतदाताओं को सूची से हटाया गया था, लेकिन लिखित शिकायत के बिना लगाए गए आरोप निराधार हैं। भाजपा ने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए उन्हें "संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ" बताया और कहा कि महाराष्ट्र में मतदाताओं की संख्या 40 लाख बढ़ी है, न कि एक करोड़। राहुल गांधी ने अपनी मतदाता अधिकार यात्रा के माध्यम से बिहार में भी इसी तरह के आरोपों को उजागर किया। “वोट जनता की शक्ति है। इसे छीनना लोकतंत्र पर हमला है।” — राहुल गांधी। संदर्भ: द टेलीग्राफ, द हिंदू, इंडिया टुडे, द वायर, टाइम्स ऑफ इंडिया, एक्स-पोस्ट
महाराष्ट्र मतदाता सूची विवाद: बलराम पाटिल और राहुल गांधी के आरोप, चुनाव आयोग पर भ्रष्टाचार का संदेह
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