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दिल्ली में 2.5 करोड़ रुपये की चोरी: घरेलू कामगार समेत तीन गिरफ्तार, बिहार से आभूषण बरामद

घटना का विवरण: 27 जून, 2025 को दिल्ली के मॉडल टाउन में एक चौंकाने वाली घटना घटी, जब अनीता झुनझुनवाला नामक महिला ने स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई कि उसका घरेलू नौकर अरुण कुमार 55 लाख रुपये नकद और कीमती सोने, हीरे और चांदी के आभूषण लेकर फरार हो गया है। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए, दिल्ली पुलिस ने तुरंत भारतीय दंड संहिता की धारा 306, 317(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने घर के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की समीक्षा की, जिसमें अरुण कुमार एक व्यक्ति के साथ बैग और ट्रॉली लेकर घर से निकलते हुए दिखाई दिया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी का पता लगाया, जो बिहार के बांका जिले के बोरही घाट गांव के पास एक जंगल की ओर इशारा कर रहा था। गिरफ्तारी और बरामदगी: 10 जुलाई, 2025 को पुलिस ने बांका जिले में क्षेत्र जांच शुरू की और तीन आरोपियों - विवेक कुमार (22 वर्ष), बीरेंद्र यादव (22 वर्ष) और पीयूष कुमार कापरी (29 वर्ष) को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, जब टीम वहां पहुंची तो आरोपी चोरी का सामान आपस में बांट रहे थे। पूछताछ के दौरान तीनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने सोना और हीरे के आभूषण, चूड़ियाँ, अंगूठियाँ, एक सोने का बिस्कुट, एक चांदी की चेन, 40 से अधिक चांदी के बर्तन, भारी मात्रा में नकदी और अन्य कीमती सामान जब्त किए गए। पुलिस उपायुक्त (उत्तर पश्चिम) भीष्म सिंह ने बताया, “अरुण कुमार ने अपने पांच गांव के साथियों के साथ मिलकर चोरी की योजना बनाई थी। चोरी के बाद, बीरेंद्र यादव ने नकदी और आभूषण दिलीप यादव को सौंप दिए, जिसने 5 लाख रुपये राजेश यादव को और बाकी मालतानी यादव को दे दिए।” चोरी का जाल: जांच में पता चला कि मालतानी यादव ने माल बरसांगांव के काश्तो यादव को दिया, जिसने इसे पवन यादव को सौंप दिया। पवन ने चोरी का सामान राधा नगर के संदीप यादव को दिया, जिसने उसमें से कुछ रख लिया। इसके बाद, नवीन यादव ने भी संदीप से 5 लाख रुपये ले लिए। डीसीपी भीष्म सिंह ने कहा, “इन सभी आरोपियों का पहले कभी किसी अपराध में कोई रिकॉर्ड नहीं था। इन्होंने रातोंरात अमीर बनने की उम्मीद में यह चोरी की।” जांच जारी है: पुलिस अरुण कुमार के बाकी साथियों की तलाश कर रही है और विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर रही है। इस गिरोह के आरोपियों की पहचान स्थापित करने के लिए उनके बैंक खातों और लेन-देन की भी गहन जांच की जा रही है। अन्य कार्य संबंधी संबंध भी सामने आए हैं। एक क्रॉस-पोस्ट में लिखा था: “दिल्ली पुलिस की इस सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कानून के शिकंजे से कोई नहीं बच सकता। लेकिन इस घटना से हमें यह भी सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि कैसे विश्वास विश्वासघात में बदल सकता है।” स्रोत: द हिंदू: इंडियन एक्सप्रेस: ​​टाइम्स ऑफ इंडिया: क्रॉस-पोस्ट