16 जून, 2025 को इज़राइल और ईरान के बीच 72 घंटे चले युद्ध में, दोनों देशों ने एक-दूसरे के प्रमुख ठिकानों पर विनाशकारी हमले किए। इज़राइल ने 2,300 किलोमीटर दूर मशहद हवाई अड्डे पर एक ईरानी ईंधन भरने वाले विमान को नष्ट कर दिया, जो युद्ध का सबसे लंबी दूरी का हमला था। ईरान ने हाइफ़ा बंदरगाह और तेल अवीव पर मिसाइलें दागकर जवाबी कार्रवाई की, जिससे व्यापक तबाही हुई। नुकसान का विवरण: ईरान: इज़राइली हमलों में 406 लोग मारे गए, जिनमें 197 नागरिक और 90 सैनिक शामिल थे, जबकि 654 घायल हुए। तेहरान के आवासीय क्षेत्रों, नतान्ज़ परमाणु संयंत्र, तेल डिपो और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। मशहद हवाई अड्डे पर विमान नष्ट हो गया और तब्रीज़ और करमानशाह में मिसाइल अड्डे पूरी तरह से नष्ट हो गए। आईआरजीसी प्रमुख हुसैन सलामी, सेना प्रमुख मोहम्मद बाक़ेरी, खुफिया प्रमुख मोहम्मद काज़ेमी और कई वरिष्ठ कमांडर और 9 परमाणु वैज्ञानिक मारे गए। इज़राइल: ईरानी हमलों में 16 लोग मारे गए, 390 घायल हुए। तेल अवीव, हाइफ़ा और बात याम में आवासीय इमारतों और एक तेल रिफाइनरी को नुकसान पहुंचा। मिसाइल हमले में हाइफ़ा बंदरगाह में आग लग गई। इज़राइल ने दावा किया कि उसने तेहरान के लिए एक "हवाई गलियारा" बनाया है, जिससे उसकी वायुसेना को निर्बाध पहुंच मिल सकेगी। इसका परिणाम यह हुआ है कि इज़राइल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ढांचे को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया है, जबकि ईरान ने इज़राइल के आर्थिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इस युद्ध को क्षेत्र में और अधिक विनाश फैलाने से रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल राजनयिक प्रयास करने चाहिए।