یٰۤاَیُّهَا الْاِنْسَانُ اِنَّكَ كَادِحٌ اِلٰى رَبِّكَ كَدْحًا فَمُلٰقِیْهِۚ(۶)(سورۃ الانشقاق)
अनुवाद
ऐ इंसान ! तू अपने परवरदिगार के पास पहुँचने तक मुसलसल किसी मेहनत में लगा रहेगा, यहाँ तक कि उससे जा मिलेगा।(६)(आसान तर्जुमा-तुल-क़ुरआन)
यानी : इंसान की पूरी ज़िंदगी किसी न किसी कोशिश में ख़र्च होती है। जो नेक लोग हैं, वह अल्लाह तआला के अहकाम की तामील में मेहनत करते हैं, और जो दुनिया परस्त हैं, वह सिर्फ़ दुनिया में मेहनत करते हैं, और जो दुनिया परस्त हैं, वह सिर्फ़ दुनिया के फ़वाइद हासिल करने के लिए मेहनत करते रहते हैं, यहाँ तक कि हर इंसान का आख़िरी अंजाम यह होता है कि वह मेहनत करता करता अल्लाह तआला के पास पहुँच जाता है।(आसान तर्जुमा-तुल-क़ुरआन)