कुरान की आयत

وَ اذْكُرْ رَّبَّكَ فِیْ نَفْسِكَ تَضَرُّعًا وَّ خِیْفَةً وَّ دُوْنَ الْجَهْرِ مِنَ الْقَوْلِ بِالْغُدُوِّ وَ الْاٰصَالِ وَ لَا تَكُنْ مِّنَ الْغٰفِلِیْنَ(۲۰۵)(سورۃ الاعراف)
अनुवाद
और अपने रब का सुबह व शाम ज़िक्र किया करो, अपने दिल में भी, आजिज़ी और ख़ौफ़ के (जज़्बात के) साथ और ज़बान से भी, आवाज़ बहुत बुलंद किए बग़ैर ! और इन लोगों में शामिल न हो जाना जो ग़फ़्लत में पड़े हुए हैं। (205) (आसान तर्जुमा क़ुरआन)
जीवन का सफर बहुत छोटा है: क्षमा और शांति का एक सुंदर सबक
लेख

जीवन का सफर बहुत छोटा है: क्षमा और शांति का एक सुंदर सबक

एक औरत बड़ी तेज़ी से बस में सवार हुई और एक दूसरी औरत के बराबर वाली सीट पर जा बैठी। उसके पर्स ने साथ बैठी औरत को चोट पहुँचाई। वह औरत खामोश रही। उसे खामोश देखकर दूसरी औरत ने सवाल किया, "तुम मेरे पर्स से चोट लगने के बावजूद खामोश क्यों रहीं?" वह औरत मुस्कुराई और बोली: "एक मामूली सी चीज़ के लिए मुझे न...

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