कुरान की आयत

اِنَّ الَّذِیْنَ قَالُوْا رَبُّنَا اللّٰهُ ثُمَّ اسْتَقَامُوْا فَلَا خَوْفٌ عَلَیْهِمْ وَ لَا هُمْ یَحْزَنُوْنَۚ(۱۳)اُولٰٓئِكَ اَصْحٰبُ الْجَنَّةِ خٰلِدِیْنَ فِیْهَا جَزَآءًۢ بِمَا كَانُوْا یَعْمَلُوْنَ(۱۴)(سورۃ الاحقاف)
अनुवाद
यक़ीनन जिन लोगों ने यह कह दिया है कि : हमारा परवरदिगार अल्लाह है, फिर वह इस पर साबित क़दम रहे तो उन पर न कोई ख़ौफ़ तारी होगा और न वह ग़मगीन होंगे। (13) वह जन्नत वाले लोग हैं जो हमेशा उसमें रहेंगे, यह उन आमाल का बदला होगा जो वह किया करते थे। (14) (आसान तर्जुमा क़ुरआन) यानी: साबित क़दम रहने में यह बात भी दाख़िल है कि मरते दम तक इस ईमान पर क़ायम रहे, और यह भी कि इसके तक़ाज़ों के मुताबिक़ ज़िंदगी बसर की। (आसान तर्जुमा क़ुरआन)
सीरत-उन-नबी ﷺ पर उपयोगी पुस्तकें
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सीरत-उन-नबी ﷺ पर उपयोगी पुस्तकें

हज़ूर-ए-अकरम ﷺ की सीरत-ए-मुबारका पर अरबी भाषा में निम्नलिखित पुस्तकों से लाभ उठाया जा सकता है: 1: अस-सीरत अन-नबविय्याह: दो खंडों (जिल्दों) में चार भागों पर आधारित यह अब्दुल मलिक बिन हिशाम अल-हिमयरी (मृत्यु: 833 हिजरी) की है, जो इब्न इसहाक़ की 'अल-मग़ाज़ी व अस-सियर' के क्रम (तरतीब) से लिखी गई है।...

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