اِنَّ الَّذِیْنَ قَالُوْا رَبُّنَا اللّٰهُ ثُمَّ اسْتَقَامُوْا فَلَا خَوْفٌ عَلَیْهِمْ وَ لَا هُمْ یَحْزَنُوْنَۚ(۱۳)اُولٰٓئِكَ اَصْحٰبُ الْجَنَّةِ خٰلِدِیْنَ فِیْهَا جَزَآءًۢ بِمَا كَانُوْا یَعْمَلُوْنَ(۱۴)(سورۃ الاحقاف)
अनुवाद
यक़ीनन जिन लोगों ने यह कह दिया है कि : हमारा परवरदिगार अल्लाह है, फिर वह इस पर साबित क़दम रहे तो उन पर न कोई ख़ौफ़ तारी होगा और न वह ग़मगीन होंगे। (13) वह जन्नत वाले लोग हैं जो हमेशा उसमें रहेंगे, यह उन आमाल का बदला होगा जो वह किया करते थे। (14) (आसान तर्जुमा क़ुरआन)
यानी: साबित क़दम रहने में यह बात भी दाख़िल है कि मरते दम तक इस ईमान पर क़ायम रहे, और यह भी कि इसके तक़ाज़ों के मुताबिक़ ज़िंदगी बसर की। (आसान तर्जुमा क़ुरआन)