और देखो हम तुम्हें आज़माएंगे ज़रूर, (कभी) ख़ौफ़ से और (कभी) भूख से (कभी) माल व जान और फलों में कमी कर के और जो लोग (ऐसे हालात में) सब्र से काम लें उनको ख़ुशख़बरी सुना दो। (155) (आसान तर्जुमा क़ुरआन)
(१) अल्लाह तआला जब किसी को औलाद दे और वह सयानी (समझदार) होने लगे, तो सबसे पहले उसको कलमा-ए-तौहीद (एकेश्वरवाद का मूलमंत्र) सिखाए। फिर उसको ज़रूरी आदाब (शिष्टाचार) सिखाए।
(२) जब सामने आए तो सलाम करे।
(३) झूठ बोलने से उसको नफ़रत दिलाए।
(४) पर्दा और हया (शालीनता) की उसको शिक्षा (ताकीद) करे।
(५) लड़क...