कुरान की आयत

اِدْفَعْ بِالَّتِیْ هِیَ اَحْسَنُ السَّیِّئَةَ نَحْنُ اَعْلَمُ بِمَا یَصِفُوْنَ(۹۶)(سورۃ المؤمنون)
अनुवाद
(लेकिन जब तक वह वक़्त न आए) तुम बुराई का दफ़िया (बचाव) ऐसे तरीक़े से करते रहो जो बेहतरीन हो। जो बातें यह लोग बनाते हैं हम ख़ूब जानते हैं। (96) (आसान तर्जुमा क़ुरआन) यानी: उनकी बेहूदगियों का और उनकी तरफ़ से जो तकलीफ़ें पहुँच रही हैं उनका जवाब हत्तल-इमकान (जहाँ तक मुमकिन हो) नर्मी, ख़ुश-अख़्लाक़ी और एहसान से दिए जाइए। (आसान तर्जुमा क़ुरआन)
परहेज़गार उस्ताद और समझदार शागिर्द
लेख

परहेज़गार उस्ताद और समझदार शागिर्द

हज़रत हकीमुल उम्मत थानवी और हज़रत शाह वसीउल्लाह इलाहाबादी (नूरुल्लाह मरक़दहुमा) दोनों ने यह वाक़िया नक़्ल किया कि एक परहेज़गार आलिम बच्चों को पढ़ाते थे। एक दिन उनके घर में फ़क्र व फ़ाक़ा (ग़रीबी और भुखमरी) था, भूख की शिद्दत (तीव्रता) से उनका चेहरा मुरझाया हुआ था। जो तलबा (छात्र) पढ़ने आते थे, उनमें...

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