اِدْفَعْ بِالَّتِیْ هِیَ اَحْسَنُ السَّیِّئَةَ نَحْنُ اَعْلَمُ بِمَا یَصِفُوْنَ(۹۶)(سورۃ المؤمنون)
अनुवाद
(लेकिन जब तक वह वक़्त न आए) तुम बुराई का दफ़िया (बचाव) ऐसे तरीक़े से करते रहो जो बेहतरीन हो। जो बातें यह लोग बनाते हैं हम ख़ूब जानते हैं। (96) (आसान तर्जुमा क़ुरआन)
यानी: उनकी बेहूदगियों का और उनकी तरफ़ से जो तकलीफ़ें पहुँच रही हैं उनका जवाब हत्तल-इमकान (जहाँ तक मुमकिन हो) नर्मी, ख़ुश-अख़्लाक़ी और एहसान से दिए जाइए। (आसान तर्जुमा क़ुरआन)