और लोगों के सामने (ग़ुरूर से) अपने गाल मत फुलाओ, और ज़मीन पर इतराते हुए मत चलो। यक़ीन जानो अल्लाह किसी इतराने वाले शेख़ीबाज़ को पसंद नहीं करता। (18) (आसान तर्जुमा क़ुरआन)
शेख मोहम्मद रावी से एक औरत ने सवाल पूछा कि उनके शौहर की वालिदा (माँ) बीमार रहती हैं। शौहर तक़ाज़ा (मांग) करता है कि मैं उनकी माँ की ख़िदमत (सेवा) करूँ और मुझसे यह सब नहीं होता। क्या मुझ पर शौहर की माँ की ख़िदमत वाजिब (अनिवार्य) है?
शेख ने जवाब दिया, "नहीं, तुझ पर शौहर की माँ की ख़िदमत हरगिज़ वाजि...