कुरान की आयत

اِنَّ الَّذِیْنَ لَا یُؤْمِنُوْنَ بِالْاٰخِرَةِ زَیَّنَّا لَهُمْ اَعْمَالَهُمْ فَهُمْ یَعْمَهُوْنَؕ(۴)(سورۃ النمل)
अनुवाद
हक़ीक़त यह है कि जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, हमने उनके आमाल को उनकी नज़रों में ख़ुशनुमा बना दिया है। इसलिए वह भटकते फिर रहे हैं। (4) (आसान तर्जुमा क़ुरआन) यानी: उनकी ज़िद्द की वजह से उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है जिसके नतीजे में वह अपने सारे बुरे आमाल को अच्छा समझते हैं, और हिदायत की तरफ़ नहीं आते। (आसान तर्जुमा क़ुरआन)
मोहम्मद नाम के चार खुश-नसीब मुहद्दिसीन: इल्म-ए-हदीस की ख़िदमत का एक हैरतअंगेज़ वाक़या
लेख

मोहम्मद नाम के चार खुश-नसीब मुहद्दिसीन: इल्म-ए-हदीस की ख़िदमत का एक हैरतअंगेज़ वाक़या

तीसरी सदी हिजरी में मिस्र में चार मुहद्दिसीन (हदीस के विद्वान) बहुत मशहूर हुए। चारों का नाम 'मोहम्मद' था, और चारों ही इल्म-ए-हदीस के जलील-उल-क़द्र (महान) अइम्मा (इमामों) में शुमार होते थे। उनमें से एक मोहम्मद बिन नस्र मर्वज़ी (रहमतुल्लाह अलैह) हैं, दूसरे मोहम्मद बिन जरीर तबरी (रहमतुल्लाह अलैह), तीसर...

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