اِنَّ الَّذِیْنَ لَا یُؤْمِنُوْنَ بِالْاٰخِرَةِ زَیَّنَّا لَهُمْ اَعْمَالَهُمْ فَهُمْ یَعْمَهُوْنَؕ(۴)(سورۃ النمل)
अनुवाद
हक़ीक़त यह है कि जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, हमने उनके आमाल को उनकी नज़रों में ख़ुशनुमा बना दिया है। इसलिए वह भटकते फिर रहे हैं। (4) (आसान तर्जुमा क़ुरआन)
यानी: उनकी ज़िद्द की वजह से उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है जिसके नतीजे में वह अपने सारे बुरे आमाल को अच्छा समझते हैं, और हिदायत की तरफ़ नहीं आते। (आसान तर्जुमा क़ुरआन)