कुरान की आयत

اَللّٰهُ وَلِیُّ الَّذِیْنَ اٰمَنُوْا یُخْرِجُهُمْ مِّنَ الظُّلُمٰتِ اِلَى النُّوْرِ وَ الَّذِیْنَ كَفَرُوْۤا اَوْلِیٰٓئُهُمُ الطَّاغُوْتُ یُخْرِجُوْنَهُمْ مِّنَ النُّوْرِ اِلَى الظُّلُمٰتِ اُولٰٓئِكَ اَصْحٰبُ النَّارِ هُمْ فِیْهَا خٰلِدُوْنَ۠(۲۵۷)(سورۃ البقرہ)
अनुवाद
अल्लाह ईमान वालों का रखवाला है, वह उन्हें अंधेरीयों से निकाल कर रोशनी में लाता है, और जिन लोगों ने कुफ़्र अपना लिया है, उनके रखवाले वह शैतान हैं जो उन्हें रोशनी से निकाल कर अंधेरीयों में ले जाते हैं, वह सब आग के बासी हैं, वह हमेशा उसी में रहेंगे (257) (आसान तर्जुमा क़ुरआन)
हज़रत हकीम-उल-इस्लाम क़ारी मोहम्मद तय्यब साहब रहमतुल्लाह अलैह, "नाश्तह" (नाश्ता) और एक बंगाली छात्र
लेख

हज़रत हकीम-उल-इस्लाम क़ारी मोहम्मद तय्यब साहब रहमतुल्लाह अलैह, "नाश्तह" (नाश्ता) और एक बंगाली छात्र

डॉ. ताबिश मेहदी अपनी आत्मकथा में लिखते हैं, हमारे बुज़ुर्ग दोस्त स्वर्गीय मुफ्ती अब्दुल रऊफ मुंसिफ मुबारकपुरी ने अपने छात्र जीवन की एक घटना एक से अधिक बार सुनाई थी। उन्होंने बताया था कि चूंकि दारुल उलूम देवबंद में नाश्ते की व्यवस्था कभी नहीं रही है, इसलिए जो छात्र नाश्ता करना चाहते हैं, वे अपने-अपने...

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