اِنَّمَاۤ اَمْوَالُكُمْ وَ اَوْلَادُكُمْ فِتْنَةٌ١ؕ وَ اللّٰهُ عِنْدَهٗۤ اَجْرٌ عَظِیْمٌ(۱۵)(سورۃ التغابن)
अनुवाद
तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद तो तुम्हारे लिए एक आज़माइश हैं। और वह अल्लाह ही है जिसके पास बड़ा अज्र है। (15) (आसान तर्जुमा क़ुरआन)
वज़ाहत: आज़माइश यह है कि इंसान माल व दौलत और औलाद की मोहब्बत में मुन्हेंमिक (मसरूफ़) होकर अल्लाह तआला के अहकाम से ग़ाफ़िल तो नहीं होता, और जो शख़्स ऐसी ग़फ़लत से अपने आप को बचाले उसके लिए अल्लाह तआला के पास बड़ा अज्र व सवाब है। (आसान तर्जुमा क़ुरआन)