خَلَقَ الْاِنْسَانَ مِنْ نُّطْفَةٍ فَاِذَا هُوَ خَصِیْمٌ مُّبِیْنٌ(۴)(سورۃ النحل)
अनुवाद
उस ने इंसान को नुत्फ़े से पैदा किया, फिर देखते ही देखते वह खुल्लम-खुल्ला झगड़े पर आमादा हो गया। (4) (आसान तर्जुमा क़ुरआन)
यानी इंसान की हक़ीक़त तो इतनी है कि वह एक नापाक बूँद से पैदा हुआ है, लेकिन जब उसे ज़रा क़ुव्वते-गोयाई (बोलने की ताक़त) मिली तो जिस ज़ात ने उसे उस नापाक बूँद से एक मुकम्मल इंसान बनाया था और उसे अशरफ़ुल-मख़लूक़ात का रुतबा बख़्शा था उसी ज़ात के साथ शरीक ठहरा कर उससे झगड़ना शुरू कर दिया। (आसान तर्जुमा क़ुरआन)