कुरान की आयत

یٰۤاَیُّهَا الَّذِیْنَ اٰمَنُوا اتَّقُوا اللّٰهَ وَ ابْتَغُوْۤا اِلَیْهِ الْوَسِیْلَةَ وَ جَاهِدُوْا فِیْ سَبِیْلِهٖ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُوْنَ(۳۵)(سورۃ المائدہ)
अनुवाद
ऐ ईमान वालो ! अल्लाह से डरो और उस तक पहुँचने के लिए वसीला तलाश करो और उसके रास्ते में जिहाद करो उम्मीद है कि तुम्हें फ़लाह हासिल होगी। (35) (आसान तर्जुमा क़ुरआन) वसीला से यहाँ मुराद हर वह नेक अमल है जो अल्लाह तआला की ख़ुशनूदी का ज़रिया बन सके और मतलब यह है कि अल्लाह तआला का क़ुर्ब हासिल करने के लिए नेक आमाल को वसीला बनाओ। (आसान तर्जुमा क़ुरआन) जिहाद के लफ़्ज़ी माअनी कोशिश और मेहनत करने के हैं, क़ुरआनी इस्तलाह में इसके माअनी आम तौर से अल्लाह तआला की रज़ा जोई के लिए दुश्मनों से लड़ने के आते हैं ; लेकिन बाज़ मर्तबा दीन पर अमल करने के लिए हर क़िस्म की कोशिश को भी जिहाद कहा जाता है, यहाँ दोनों माअनी मुराद हो सकते हैं। (आसान तर्जुमा क़ुरआन)
इल्म-ए-नाफ़े (लाभकारी ज्ञान) की निशानियां
लेख

इल्म-ए-नाफ़े (लाभकारी ज्ञान) की निशानियां

एक सवाल ज़हन में पैदा होता है कि इल्म-ए-नाफ़े (फ़ायदा पहुँचाने वाले ज्ञान) की अलामत (निशानी) क्या होती है? जी हाँ, नफ़ा (लाभ) देने वाला इल्म भी होता है। नबी अलैहिस्सलाम ने हमें दुआ सिखाई है: "ऐ अल्लाह! मैं पनाह माँगता हूँ ऐसे इल्म से जो नफ़ा न देता हो।" चुनाँचे इल्म-ए-नाफ़े की दो अलामतें (निशानियाँ)...

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