وَ مَا هٰذِهِ الْحَیٰوةُ الدُّنْیَاۤ اِلَّا لَهْوٌ وَّ لَعِبٌ وَ اِنَّ الدَّارَ الْاٰخِرَةَ لَهِیَ الْحَیَوَانُ لَوْ كَانُوْا یَعْلَمُوْنَ(۶۴)(سورۃ العنکبوت)
अनुवाद
और यह दुनियावी ज़िंदगी खेल कूद के सिवा कुछ भी नहीं और हक़ीक़त यह है कि दार-ए-आख़िरत ही असल ज़िंदगी है, अगर यह लोग जानते होते। (64) (आसान तर्जुमा क़ुरआन)
यानी जिस तरह खेल कूद में कुछ देर तो मज़ा आता है, मगर वह कोई पायदार चीज़ नहीं है, ज़रा देर गुज़रने के बाद सारा तमाशा ख़त्म हो जाता है, इसी तरह दुनिया की लज़्ज़तें भी नापायदार हैं, और कुछ ही अर्से में सब ख़त्म हो जाएँगी। इसके बरख़िलाफ़ आख़िरत की ज़िंदगी हमेशा के लिए है, इसलिए उसकी लज़्ज़तें और नेमतें सदाबहार हैं। इसलिए असल ज़िंदगी आख़िरत ही की ज़िंदगी है। (आसान तर्जुमा क़ुरआन)