कुरान की आयत

وَلَا تَقُولَنَّ لِشَيْءٍ إِنِّي فَاعِلٌ ذَٰلِكَ غَدًا (۲۳)إِلَّا أَن يَشَاءَ اللَّهُ ۚ وَاذْكُر رَّبَّكَ إِذَا نَسِيتَ وَقُلْ عَسَىٰ أَن يَهْدِيَنِ رَبِّي لِأَقْرَبَ مِنْ هَٰذَا رَشَدًا (۲۴)(سورۃ الکہف)
अनुवाद
और (ऐ पैग़म्बर!) किसी भी काम के बारे में कभी यह न कहो कि मैं यह काम कल कर लूंगा, (23) हाँ (यह कहो कि) अल्लाह चाहेगा तो (कर लूंगा) और जब कभी भूल जाओ तो अपने रब को याद करलो, और कहो: ” मुझे उम्मीद है कि मेरा रब किसी ऐसी बात की तरफ़ मेरी रहनुमाई कर दे जो हिदायत में इससे भी ज़्यादा क़रीब हो।" (आसान तर्जुमा-उल-क़ुरआन)
मोहम्मद नाम के चार खुश-नसीब मुहद्दिसीन: इल्म-ए-हदीस की ख़िदमत का एक हैरतअंगेज़ वाक़या
लेख

मोहम्मद नाम के चार खुश-नसीब मुहद्दिसीन: इल्म-ए-हदीस की ख़िदमत का एक हैरतअंगेज़ वाक़या

तीसरी सदी हिजरी में मिस्र में चार मुहद्दिसीन (हदीस के विद्वान) बहुत मशहूर हुए। चारों का नाम 'मोहम्मद' था, और चारों ही इल्म-ए-हदीस के जलील-उल-क़द्र (महान) अइम्मा (इमामों) में शुमार होते थे। उनमें से एक मोहम्मद बिन नस्र मर्वज़ी (रहमतुल्लाह अलैह) हैं, दूसरे मोहम्मद बिन जरीर तबरी (रहमतुल्लाह अलैह), तीसर...

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