और जब किसी शख़्स का मुअय्यन वक़्त आ जाएगा तो अल्लाह उसे हरगिज़ मोहलत नहीं देगा, और जो कुछ तुम करते हो, अल्लाह उससे पूरी तरह बाख़बर है (11) (आसान तर्जुमा क़ुरआन)
हज़रत मौलाना मुहम्मद क़ासिम साहब नानौतवी (रहमतुल्लाही अलैहि) का मुज़फ़्फ़रनगर में एक थानेदार मुअतक़िद (भक्त/प्रशंसक) था। एक दिन उसने हज़रत मौलाना नानौतवी की दावत की। मौलाना ने देखा था कि थानेदार की कमाई मुश्तबा (संदिग्ध) और मशकूक है, इस वजह से उसकी दावत को नामंज़ूर फ़रमा दिया।
थानेदार ने दावत क़ब...