وَ اَنِیْبُوْۤا اِلٰى رَبِّكُمْ وَ اَسْلِمُوْا لَهٗ مِنْ قَبْلِ اَنْ یَّاْتِیَكُمُ الْعَذَابُ ثُمَّ لَا تُنْصَرُوْنَ(۵۴)(سورۃ الزمر)
अनुवाद
और तुम अपने परवरदिगार से लौ लगाओ, और उसके फ़रमाँबरदार बन जाओ क़ब्ल इसके कि तुम्हारे पास अज़ाब आ पहुँचे, फिर तुम्हारी मदद नहीं की जाएगी (54) (आसान तर्जुमा क़ुरआन)