یٰۤاَیُّهَا الَّذِیْنَ اٰمَنُوْا قُوْۤا اَنْفُسَكُمْ وَ اَهْلِیْكُمْ نَارًا وَّ قُوْدُهَا النَّاسُ وَ الْحِجَارَةُ عَلَیْهَا مَلٰٓئِكَةٌ غِلَاظٌ شِدَادٌ لَّا یَعْصُوْنَ اللّٰهَ مَاۤ اَمَرَهُمْ وَ یَفْعَلُوْنَ مَا یُؤْمَرُوْنَ (۶)(سورۃ التحریم)
अनुवाद
ऐ ईमान वालो ! अपने आप को और अपने घर वालों को उस आग से बचाओ जिसका ईंधन इंसान और पत्थर होंगे उस पर सख़्त कड़े मिज़ाज के फ़रिश्ते मुक़र्रर हैं जो अल्लाह के किसी हुक्म में उसकी नाफ़रमानी नहीं करते, और वही करते हैं जिसका उन्हें हुक्म दिया जाता है (6) (आसान तर्जुमा क़ुरआन)