مَّا يَفْتَحِ اللَّهُ لِلنَّاسِ مِن رَّحْمَةٍ فَلَا مُمْسِكَ لَهَا وَمَا يُمْسِكْ فَلَا مُرْسِلَ لَهُ مِن بَعْدِهِ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ (۲)(سورۃ فاطر)
अनुवाद
जिस रहमत को अल्लाह लोगों के लिए खोल दे, कोई नहीं है जो उसे रोक सके, और जिसे वह रोक ले, तो कोई नहीं है जो उसके बाद उसे छुड़ा सके। और वही है जो इक़्तेदार का भी मालिक है, हिकमत का भी मालिक (2) (आसान तर्जुमा क़ुरआन)