कुरान की आयत

لَا أُقْسِمُ بِهَٰذَا الْبَلَدِ (۱) وَأَنتَ حِلٌّ بِهَٰذَا الْبَلَدِ (۲) وَوَالِدٍ وَمَا وَلَدَ (۳) لَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ فِي كَبَدٍ (۴)(سورۃ البلد)
अनुवाद
मैं क़स्म खाता हूँ इस शहर की (1) जबकि (ऐ पैग़म्बर!) तुम इस शहर में मुक़ीम हो (2) और (क़स्म खाता हूँ) बाप की और उसकी औलाद की (3) कि हमने इंसान को मषक़्क़त में पैदा किया है (4) (यह वह बात है जो क़स्म खाकर फ़रमाई गई है मतलब यह है कि दुनिया में इंसान को इस तरह पैदा किया गया है कि वह किसी न किसी मषक़्क़त में लगा रहता है। चाहे कोई कितना बड़ा हाकिम हो, या दौलतमंद शख़्स हो, उसे ज़िंदा रहने के लिए मषक़्क़त उठानी ही पड़ती है। लिहाज़ा अगर कोई शख़्स यह चाहे कि उसे दुनिया में कभी कोई मेहनत करनी न पड़े तो यह उसकी ख़ाम-ख़्याली है। ऐसा कभी मुमकिन ही नहीं है। आसान तर्जुमा-उल-क़ुरआन)
तुलना करना छोड़ें, खुद पर विश्वास रखें
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तुलना करना छोड़ें, खुद पर विश्वास रखें

शेर और शार्क दोनों पेशेवर शिकारी हैं, लेकिन शेर समुद्र में शिकार नहीं कर सकता और शार्क ज़मीन पर शिकार नहीं कर सकती। 🦈 शेर को समुद्र में शिकार न कर पाने के कारण बेकार नहीं कहा जा सकता और शार्क को जंगल में शिकार न कर पाने के कारण बेकार नहीं कहा जा सकता। दोनों की अपनी-अपनी सीमाएँ हैं जहाँ वे सर्वश्रे...

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