कुरान की आयत

وَلَوْ يُؤَاخِذُ ٱللَّهُ ٱلنَّاسَ بِظُلْمِهِم مَّا تَرَكَ عَلَيْهَا مِن دَآبَّةٍۢ وَلَٰكِن يُؤَخِّرُهُمْ إِلَىٰٓ أَجَلٍۢ مُّسَمًّى ۖ فَإِذَا جَآءَ أَجَلُهُمْ لَا يَسْتَـْٔخِرُونَ سَاعَةً ۖ وَلَا يَسْتَقْدِمُونَ(۶۱)(سورۃ النحل)
अनुवाद
और अगर अल्लाह लोगों को उनके ज़ुल्म की वजह से (फ़ौरन) अपनी पकड़ में लेता तो रू-ए-ज़मीन पर कोई जानदार बाक़ी न छोड़ता लेकिन वह उनको एक मोअय्यन वक़्त तक मोहलत देता है। फिर जब उनका वह मोअय्यन वक़्त आ जाएगा तो वे घड़ी भर भी उससे आगे-पीछे नहीं हो सकेंगे (61) (आसान तर्जुमा-उल-क़ुरआन)
आख़िरी सफ़र की पुकार
लेख

आख़िरी सफ़र की पुकार

सालिहीन (नेक लोगों) में से एक शख़्स रोज़ाना शहर की दीवार पर खड़े होकर रात में यह आवाज़ लगाता था, "चलो, क़ाफ़िले के चलने का वक़्त आ गया है"। जब उनका इंतक़ाल (निधन) हो गया, तो शहर के हाकिम (शासक) को यह आवाज़ सुनाई नहीं दी। तहक़ीक़ (जांच) करने पर पता चला कि उनकी वफ़ात हो गई है, तो अमीर (शासक) ने ये अशआ...

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