وَ عَلَى اللّٰهِ قَصْدُ السَّبِیْلِ وَ مِنْهَا جَآئِرٌ وَ لَوْ شَآءَ لَهَدٰىكُمْ اَجْمَعِیْنَ۠(۹)(سورۃ النحل)
अनुवाद
और सीधा रास्ता दिखाने की ज़िम्मेदारी अल्लाह ने ली है, और बहुत से रास्ते टेढ़े हैं और अगर वह चाहता तो तुम सब को सीधे रास्ते पर पहुंचा भी देता¹।
मतलब¹ : यह है कि जिस तरह अल्लाह तआला ने इंसान को दुनिया के रास्ते तय करने के लिए सवारियां पैदा की हैं, उसी तरह आख़िरत का रूहानी सफ़र तय करने के लिए सीधा रास्ता दिखाने की ज़िम्मेदारी भी ली है, क्योंकि लोगों ने इस काम के लिए बहुत से टेढ़े रास्ते बना रखे हैं, उनसे बचाने के लिए अल्लाह तआला लोगों को सीधा रास्ता अपने पैग़म्बरों और अपनी किताबों के ज़रिए दिखाता है, अल्बत्ता वह किसी को ज़बरदस्ती उठा कर इस रास्ते पर नहीं ले जाता, अगरचे वह चाहता तो यह भी कर सकता था; लेकिन इस दुनिया में इंसान से मुतालिबा यह है कि वह अल्लाह तआला के दिखाए हुए रास्ते पर अपने इख़्तियार से चले ज़बरदस्ती नहीं, इसलिए अल्लाह तआला अपने रसूलों के ज़रिए रास्ता दिखाने पर इक्तिफ़ा फ़रमाता है। (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन)