और ये लोग तुम से पूछते हैं कि क्या यह (आख़िरत का अज़ाब) वाक़ई सच है? कह दो कि: मेरे परवरदिगार की क़सम यह बिल्कुल सच है, और तुम (अल्लाह को) आजिज़ नहीं कर सकते। (आसान तर्जुमा अल-क़ुरआन)
यह उस ज़माने की बात है जब दुनिया में बादशाहतें (राजशाही) क़ायम थीं और कई-कई मील पर फैली हुई रियासतों पर विभिन्न ख़ानदानों की हुकूमत हुआ करती थी। इसी दौर के एक बादशाह पर क़ुदरत मेहरबान हुई और उसके एक अक्लमंद वज़ीर और बहादुर सिपाहसालार की बदौलत उसकी सल्तनत वसीअ (विशाल) होती चली गई। इस बादशाह के पड़ोसी...