कुरान की आयत

وَ مَا مِنْ دَآبَّةٍ فِی الْاَرْضِ اِلَّا عَلَى اللّٰهِ رِزْقُهَا وَ یَعْلَمُ مُسْتَقَرَّهَا وَ مُسْتَوْدَعَهَا كُلٌّ فِیْ كِتٰبٍ مُّبِیْنٍ(۶)(سورۃ هود)
अनुवाद
और ज़मीन पर चलने वाला कोई जानदार ऐसा नहीं है जिसका रिज़्क़ अल्लाह ने अपने ज़िम्मे न ले रखा हो, वह उसके मुस्तक़िल ठिकाने को भी जानता है, और आरज़ी ठिकाने को भी। हर बात एक वाज़ेह (स्पष्ट) किताब में दर्ज है। (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन)
बाप का आखिरी खत
लेख

बाप का आखिरी खत

कहानी का शीर्षक: "पिताजी ने कहा था जल्दी वापस आऊँगा... मगर ग्यारह साल बीत गए" मैं सिर्फ़ आठ साल का था जब पिताजी ने घर से जाते हुए मेरे सिर पर हाथ रखा और मुस्कुरा कर कहा: "बेटा, बस कुछ महीनों की बात है... फिर मैं वापस आ जाऊँगा।" उस समय मुझे नहीं पता था कि कुछ "चंद महीने" पूरा बचपन निगल जाते हैं। ह...

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