قُلْ اِنْ كُنْتُمْ تُحِبُّوْنَ اللّٰهَ فَاتَّبِعُوْنِیْ یُحْبِبْكُمُ اللّٰهُ وَ یَغْفِرْ لَكُمْ ذُنُوْبَكُمْ وَ اللّٰهُ غَفُوْرٌ رَّحِیْمٌ(۳۱)(سورۃ آل عمران)
अनुवाद
(ऐ पैगंबर! लोगों से) कह दो कि अगर तुम अल्लाह से मुहब्बत रखते हो तो मेरी इत्तेबा (पैरवी) करो, अल्लाह तुम से मुहब्बत करेगा और तुम्हारी ख़ातिर तुम्हारे गुनाह माफ़ कर देगा। और अल्लाह बहुत माफ़ करने वाला, बड़ा मेहरबान है। (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन)