وَ مِنَ النَّاسِ مَنْ یُّجَادِلُ فِی اللّٰهِ بِغَیْرِ عِلْمٍ وَّ لَا هُدًى وَّ لَا كِتٰبٍ مُّنِیْرٍۙ(۸)ثَانِیَ عِطْفِهٖ لِیُضِلَّ عَنْ سَبِیْلِ اللّٰهِ لَهٗ فِی الدُّنْیَا خِزْیٌ وَّ نُذِیْقُهٗ یَوْمَ الْقِیٰمَةِ عَذَابَ الْحَرِیْقِ(۹)ذٰلِكَ بِمَا قَدَّمَتْ یَدٰكَ وَ اَنَّ اللّٰهَ لَیْسَ بِظَلَّامٍ لِّلْعَبِیْدِ۠(۱۰)(سورۃ الحج)
अनुवाद
और लोगों में कुछ ऐसे हैं जो अल्लाह के बारे में झगड़े करते हैं, हालांकि उनके पास न कोई इल्म है न हिदायत, और न कोई रोशनी देने वाली किताब। (8) वह तकब्बुर से अपना पहलू अकड़ाए हुए हैं, ताकि दूसरों को भी अल्लाह के रास्ते से गुमराह करें, ऐसे ही शख़्स के लिए दुनिया में रुसवाई है, और क़यामत के दिन हम उसे जलती हुई आग का मज़ा चखाएंगे। (9) (कि) यह सब कुछ तेरे उस करतूत का बदला है जो तूने अपने हाथों से आगे भेजा था, और यह बात तय है कि अल्लाह बंदों पर ज़ुल्म ढाने वाला नहीं है। (10) (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन)