जिस किसी मादा को जो हम्ल (गर्भ) होता है, अल्लाह उसको भी जानता है, और माओं के रहम (गर्भाशय) में जो कोई कमी-बेशी होती है उसको भी, और हर चीज़ का उसके पास एक अंदाज़ा मुक़र्रर है। (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन)
यानी: अल्लाह तआला के इल्म में है कि किस मां के पेट में कैसा बच्चा है। और रहम में रहते हुए हम्ल बढ़ रहा है या घट रहा है। (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन)
शायर-ए-मशरिक़ (पूर्व के कवि) अल्लामा मोहम्मद इकबाल ने सुन्नत-ए-रसूल (पैगंबर की परंपरा) के पालन को अपना शियोवा-ए-हयात (जीवन का तरीका) बना लिया था। "जौहर-ए-इक़बाल" में एक अजीब और बसीरत अफ़रोज़ (ज्ञानवर्धक) घटना का वर्णन किया गया है, जिससे अल्लामा इकबाल के जज़्बा-ए-शौक़ और इतात-ए-रसूल (रसूल के प्रति प्...