कुरान की आयत

اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ رَبِّ الْعٰلَمِیْنَۙ۔(۲)(سورۃ الفاتحۃ)
अनुवाद
तमाम तारीफ़ें अल्लाह की हैं जो तमाम जहानों का परवरदिगार है। (2) (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन) यानी: अगर आप किसी इमारत की तारीफ़ करें तो दर-हक़ीक़त वह उसके बनाने वाले की तारीफ़ होती है, लिहाज़ा इस कायनात में जिस किसी चीज़ की तारीफ़ की जाए वह बिलआख़िर अल्लाह तआला ही की तारीफ़ है; क्योंकि वह चीज़ उसी की बनाई हुई है, तमाम जहानों का परवरदिगार कह कर उसी तरफ़ इशारा किया गया है, इंसानों का जहान हो या जानवरों का, सब की तख़्लीक़ और परवरिश अल्लाह तआला ही का काम है और इन जहानों में जो कोई चीज़ क़ाबिले-तारीफ़ है वह अल्लाह तआला की तख़्लीक़ और शान-ए-रूबूबियत की वजह से है। (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन)
हज़रत हकीम-उल-इस्लाम क़ारी मोहम्मद तय्यब साहब रहमतुल्लाह अलैह, "नाश्तह" (नाश्ता) और एक बंगाली छात्र
लेख

हज़रत हकीम-उल-इस्लाम क़ारी मोहम्मद तय्यब साहब रहमतुल्लाह अलैह, "नाश्तह" (नाश्ता) और एक बंगाली छात्र

डॉ. ताबिश मेहदी अपनी आत्मकथा में लिखते हैं, हमारे बुज़ुर्ग दोस्त स्वर्गीय मुफ्ती अब्दुल रऊफ मुंसिफ मुबारकपुरी ने अपने छात्र जीवन की एक घटना एक से अधिक बार सुनाई थी। उन्होंने बताया था कि चूंकि दारुल उलूम देवबंद में नाश्ते की व्यवस्था कभी नहीं रही है, इसलिए जो छात्र नाश्ता करना चाहते हैं, वे अपने-अपने...

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