कुरान की आयत

اِیَّاكَ نَعْبُدُ وَ اِیَّاكَ نَسْتَعِیْنُؕ(۵)(سورۃ الفاتحۃ)
अनुवाद
(ऐ अल्लाह) हम तेरी ही इबादत करते हैं और तुझी से मदद मांगते हैं। (5) (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन) यानी: यहाँ से बंदों को अल्लाह तआला से दुआ करने का तरीक़ा सिखाया जा रहा है और इसी के साथ यह वाज़ेह कर दिया गया है कि अल्लाह तआला के सिवा कोई किसी क़िस्म की इबादत के लायक़ नहीं, नीज़ हर काम में हक़ीक़ी मदद अल्लाह तआला ही से मांगनी चाहिए; क्योंकि सही मायनों में कारसाज़ उसके सिवा कोई नहीं, दुनिया के बहुत से कामों में बाज़ औक़ात किसी इंसान से जो मदद मांगी जाती है, वह उसे कारसाज़ समझ कर नहीं; बल्कि एक ज़ाहिरी सबब समझ कर मांगी जाती है। (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन)
अल्लाह की रहमत पर कामिल भरोसा
लेख

अल्लाह की रहमत पर कामिल भरोसा

हज़रत मौलाना मोहम्मद अशरफ़ अली थानवी रहमतुल्लाह अलैह जब कोई दुआ मांगते और आंख से कोई आंसू आता, तो हज़रत उन आंसुओं को अपने चेहरे पर मल लिया करते थे। एक बार एक छात्र (طالب علم) ने देख लिया। उसने कहा, "हज़रत! आपका यह अमल किस बिना पर (किस आधार पर) है?" फ़रमाया: "मैं उम्मीद करता हूँ कि अल्लाह तआला इन...

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