अल्लाह की मस्जिदों को तो वही लोग आबाद करते हैं जो अल्लाह और यौम-ए-आख़िरत पर ईमान लाए हों और नमाज़ क़ायम करें और ज़कात अदा करें और अल्लाह के सिवा किसी से न डरें। ऐसे ही लोगों से यह तवक़्क़ो हो सकती है कि वह सही रास्ता इख़्तियार करने वालों में शामिल होंगे। (18) (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन)
एक लोमड़ (सियार) की दुम (पूंछ) पर पत्थर आ गिरा, और दुम कट गई।
एक दूसरे लोमड़ ने जब उसे देखा तो पूछा, "यह तुमने अपनी दुम क्यों काटी?"
दुम कटा लोमड़ बोला, "इससे बड़ी खुशी और फरहत (आनंद) महसूस होती है। ऐसा लगता है जैसे हवाओं में उड़ रहा हूँ। वाह!! क्या मनोरंजन है!"
बस घेर-घार कर (बहला-फुसलाकर) उ...