وَ قَالَ الَّذِیْنَ كَفَرُوْا لِرُسُلِهِمْ لَنُخْرِجَنَّكُمْ مِّنْ اَرْضِنَاۤ اَوْ لَتَعُوْدُنَّ فِیْ مِلَّتِنَا فَاَوْحٰۤى اِلَیْهِمْ رَبُّهُمْ لَنُهْلِكَنَّ الظّٰلِمِیْنَۙ(۱۳)وَ لَنُسْكِنَنَّكُمُ الْاَرْضَ مِنْۢ بَعْدِهِمْ ذٰلِكَ لِمَنْ خَافَ مَقَامِیْ وَ خَافَ وَعِیْدِ(۱۴)(سورۃ ابراہیم)
अनुवाद
और जिन लोगों ने कुफ़्र अपना लिया था, उन्होंने अपने पैग़म्बरों से कहा कि: हम तुम्हें अपनी सरज़मीन से निकाल कर रहेंगे, वरना तुम्हें हमारे दीन में वापस आना पड़ेगा। चुनांचे उनके परवरदिगार ने उन पर वह्य भेजी कि: यक़ीन रखो, हम इन ज़ालिमों को हलाक कर देंगे। (13) और उनके बाद यक़ीनन तुम्हें ज़मीन में बसाएंगे, यह है हर उस शख़्स का सिला जो मेरे सामने खड़ा होने का ख़ौफ़ रखता और मेरी वईद से डरता है। (14) (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन)