(जिहाद के लिए) निकल खड़े हो, चाहे तुम हल्के हो या बोझल, और अपने माल व जान से अल्लाह के रास्ते में जिहाद करो। अगर तुम समझ रखते हो तो यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है। (41) (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन)
एक हदीस हज़रत अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से मर्वी (वर्णित) है... फ़रमाते हैं कि एक मर्तबा हुज़ूर अक़्दस (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने पिछली उम्मतों के एक शख़्स का वाक़िया बयान फ़रमाया... कि एक शख़्स था जिसने अपनी जान पर बड़ा ज़ुल्म किया था... बड़े-बड़े गुनाह किए थे... बड़ी ख़राब ज़िंदगी गुज़ारी थी....