قُلِ انْظُرُوْا مَا ذَا فِی السَّمٰوٰتِ وَ الْاَرْضِ وَ مَا تُغْنِی الْاٰیٰتُ وَ النُّذُرُ عَنْ قَوْمٍ لَّا یُؤْمِنُوْنَ(۱۰۱)(سورۃ یونس)
अनुवाद
(ऐ पैगंबर!) उनसे कहो कि: ज़रा नज़र दौड़ाओ कि आसमानों और ज़मीन में क्या-क्या चीज़ें हैं? लेकिन जिन लोगों को ईमान लाना ही नहीं है उनके लिए (ज़मीन व आसमान में फैली हुई) निशानियाँ और आगाह करने वाले (पैगंबर) कुछ भी कारआमद (फायदेमंद) नहीं होते। (101) (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन)
यानी: इस कायनात (सृष्टि) की हर चीज़ को अगर इन्साफ़ की नज़र से देखा जाए तो वह अल्लाह तआला की क़ुदरत और हिकमत का शाहकार (उत्कृष्ट नमूना) है, इससे न सिर्फ़ यह मालूम होता है कि यह मुहय्यिरुल-अक़्ल (हैरतअंगेज़) कारख़ाना ख़ुद-ब-ख़ुद वजूद में नहीं आ गया, इसे अल्लाह तआला ने पैदा किया है, बल्कि इससे यह भी समझ में आता है कि जो ज़ात इतनी अज़ीम (विशाल) कायनात पैदा करने पर क़ादिर है, उसे अपनी ख़ुदाई के लिए किसी शरीक या मददगार की हाजत (ज़रूरत) नहीं है, लिहाज़ा वह है, और एक है, उसका कोई शरीक नहीं।
इस आइना-ख़ाने में सभी अक्स हैं तेरे,
इस आइना-ख़ाने में तू यकता (अकेला) ही रहेगा। (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन)