فَأَمَّا مَنْ أَعْطىٰ وَاتَّقىٰ (۵) وَصَدَّقَ بِالْحُسْنىٰ (۶) فَسَنُيَسِّرُهُ لِلْيُسْرىٰ (۷) وَأَمَّا مَن بَخِلَ وَاسْتَغْنىٰ (۸) وَكَذَّبَ بِالْحُسْنىٰ (۹)فَسَنُيَسِّرُهُ لِلْعُسْرىٰ(۱۰)(سورۃ اللیل)
अनुवाद
अब जिस किसी ने (अल्लाह के रास्ते में माल) दिया, और तक़्वा इख़्तियार किया (5) और सब से अच्छी बात को दिल से माना (6) तो हम उसको आराम की मंज़िल तक पहुँचने की तैयारी करा देंगे (7) रहा वह शख़्स जिसने बुख़्ल से काम लिया और (अल्लाह से) बे-नियाज़ी इख़्तियार की (8) और सब से अच्छी बात को झुठलाया (9) तो हम उसको तकलीफ़ की मंज़िल तक पहुँचने की तैयारी करा देंगे (10)। (आसान तर्जुमा-उल-क़ुरआन)