कुरान की आयत

یٰۤاَیُّهَا الَّذِیْنَ اٰمَنُوْا كُوْنُوْا قَوّٰمِیْنَ لِلّٰهِ شُهَدَآءَ بِالْقِسْطِ وَ لَا یَجْرِمَنَّكُمْ شَنَاٰنُ قَوْمٍ عَلٰۤى اَلَّا تَعْدِلُوْا اِعْدِلُوْا هُوَ اَقْرَبُ لِلتَّقْوٰى وَ اتَّقُوا اللّٰهَ اِنَّ اللّٰهَ خَبِیْرٌۢ بِمَا تَعْمَلُوْنَ(۸)(سورۃ المائدہ)
अनुवाद
ऐ ईमान वालो! ऐसे बन जाओ कि अल्लाह (के अहकाम की पाबंदी) के लिए हर वक़्त तैयार हो (और) इन्साफ़ की गवाही देने वाले हो, और किसी क़ौम की दुश्मनी तुम्हें इस बात पर आमादा न करे कि तुम नाइन्साफ़ी करो। इन्साफ़ से काम लो, यही तरीक़ा तक़्वा से क़रीब तर है। और अल्लाह से डरते रहो। अल्लाह यक़ीनन तुम्हारे तमाम कामों से पूरी तरह बाख़बर है। (8) (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन)
अल्लाह की मर्ज़ी अल्लाह ही जाने: एक इबरतअंगेज़ वाक़या
लेख

अल्लाह की मर्ज़ी अल्लाह ही जाने: एक इबरतअंगेज़ वाक़या

सामान से लदा हुआ एक बहरी जहाज़ (समुद्री जहाज़) महवे-सफ़र था कि तेज़ हवाओं की वजह से वह उलटने लगा। क़रीब था कि जहाज़ डूब जाता, उसमें मौजूद ताज़िरों (व्यापारियों) ने कहा कि बोझ हल्का करने के लिए कुछ सामान समंदर बुर्द (समुद्र में डालना) करते हैं। ताज़िरों ने मशविरा करके तय किया कि सबसे ज़्यादा सामान जि...

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