कुरान की आयत

وَ اللّٰهُ خَلَقَكُمْ مِّنْ تُرَابٍ ثُمَّ مِنْ نُّطْفَةٍ ثُمَّ جَعَلَكُمْ اَزْوَاجًا وَ مَا تَحْمِلُ مِنْ اُنْثٰى وَ لَا تَضَعُ اِلَّا بِعِلْمِهٖ وَ مَا یُعَمَّرُ مِنْ مُّعَمَّرٍ وَّ لَا یُنْقَصُ مِنْ عُمُرِهٖۤ اِلَّا فِیْ كِتٰبٍ اِنَّ ذٰلِكَ عَلَى اللّٰهِ یَسِیْرٌ(۱۱)(سورۃ فاطر)
अनुवाद
और अल्लाह ने तुम्हें मिट्टी से पैदा किया, फिर नुत्फ़े से, फिर तुम्हें जोड़े-जोड़े बना दिया। और किसी मादा को जो कोई हम्ल होता है, और जो कुछ वह जनती है वह सब अल्लाह के इल्म से होता है। और किसी उम्र-रसीदा को जितनी उम्र दी जाती है, और उसकी उम्र में जो कोई कमी होती है, वह सब एक किताब में दर्ज है। हक़ीक़त यह है कि यह सब कुछ अल्लाह के लिए बहुत आसान है। (11) (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन)
शीशे से दीवार तक
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शीशे से दीवार तक

एक महिला कहती हैं: एक दिन मैं अपने घर की सफ़ाई कर रही थी, इतने में मेरा बेटा आया और शीशे का एक नायाब तोहफा (शाहकार) गिरा दिया और वह टूट गया। मैं उससे बहुत नाराज़ थी क्योंकि यह बहुत महंगा था, मेरी मां ने मुझे दिया था, मैं इसे पसंद करती थी और इसे संभालकर रखना चाहती थी। मैंने गुस्से में उसे बुलाया और...

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