وَإِذَا سَمِعُوا اللَّغْوَ أَعْرَضُوا عَنْهُ وَقَالُوا لَنَا أَعْمَالُنَا وَلَكُمْ أَعْمَالُكُمْ سَلَامٌ عَلَيْكُمْ لَا نَبْتَغِي الْجَاهِلِينَ(۵۵)(سورۃ القصص)
अनुवाद
और जब वो कोई बेहूदा (व्यर्थ) बात सुनते हैं तो उसे टाल जाते हैं, और कहते हैं कि: "हमारे लिए हमारे आमाल (कर्म) हैं, और तुम्हारे लिए तुम्हारे आमाल। हम तुम्हें सलाम करते हैं। हम नादान (अज्ञानी) लोगों से उलझना नहीं चाहते।" (55) (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन)
यानी: तुमसे बहस में उलझना नहीं चाहते, हाँ यह दुआ करते हैं कि तुम्हें इस्लाम की तौफ़ीक़ (सौभाग्य) मिले, और इसके नतीजे में तुम्हें सलामती अता हो। (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन)