कुरान की आयत

وَإِذَا سَمِعُوا اللَّغْوَ أَعْرَضُوا عَنْهُ وَقَالُوا لَنَا أَعْمَالُنَا وَلَكُمْ أَعْمَالُكُمْ سَلَامٌ عَلَيْكُمْ لَا نَبْتَغِي الْجَاهِلِينَ(۵۵)(سورۃ القصص)
अनुवाद
और जब वो कोई बेहूदा (व्यर्थ) बात सुनते हैं तो उसे टाल जाते हैं, और कहते हैं कि: "हमारे लिए हमारे आमाल (कर्म) हैं, और तुम्हारे लिए तुम्हारे आमाल। हम तुम्हें सलाम करते हैं। हम नादान (अज्ञानी) लोगों से उलझना नहीं चाहते।" (55) (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन) यानी: तुमसे बहस में उलझना नहीं चाहते, हाँ यह दुआ करते हैं कि तुम्हें इस्लाम की तौफ़ीक़ (सौभाग्य) मिले, और इसके नतीजे में तुम्हें सलामती अता हो। (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन)
एक ही सफ में खड़े हो गए महमूद व अयाज़
लेख

एक ही सफ में खड़े हो गए महमूद व अयाज़

इमाम अबू यूसुफ रहमतुल्लाह अलैह हारून रशीद के ज़माने में पूरे आलम-ए-इस्लाम के क़ाज़ी-उल-क़ुज़ात (मुख्य न्यायाधीश) थे, एक बार उनके पास ख़लीफ़ा हारून रशीद और एक नसरानी (ईसाई) का मुक़दमा आया, इमाम ने फ़ैसला नसरानी के हक़ में किया, इस तरह के दरख़्शां (चमकदार) वाक़यात तारीख़-ए-इस्लाम के वरक़-वरक़ (पन्ने-प...

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