اَفَمَنْ كَانَ عَلٰى بَیِّنَةٍ مِّنْ رَّبِّهٖ كَمَنْ زُیِّنَ لَهٗ سُوْٓءُ عَمَلِهٖ وَ اتَّبَعُوْۤا اَهْوَآءَهُمْ(۱۴)(سورۃ محمد)
अनुवाद
अब बताओ कि जो लोग अपने परवरदिगार (पालहार) की तरफ़ से एक रौशन रास्ते पर हों, क्या वह उन जैसे हो सकते हैं जिनकी बदकारी ही उनके लिए ख़ुशनुमा (आकर्षक) बना दी गई हो, और वह अपनी नफ़्सानी ख़्वाहिशात (वासनाओं) के पीछे चलते हों? (14) (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन)