وَ مَنْ كَفَرَ فَلَا یَحْزُنْكَ كُفْرُهٗ اِلَیْنَا مَرْجِعُهُمْ فَنُنَبِّئُهُمْ بِمَا عَمِلُوْا اِنَّ اللّٰهَ عَلِیْمٌۢ بِذَاتِ الصُّدُوْرِ(۲۳)(سورۃ لقمان)
अनुवाद
और (ऐ पैगंबर!) जिस किसी ने कुफ़्र अपना लिया है, तुम्हें उसका कुफ़्र सदमे में न डाले। आख़िर उन्हें हमारे पास ही तो लौटना है, फिर हम उन्हें बताएंगे कि उन्होंने क्या किया है? यक़ीनन अल्लाह सीनों में छुपी हुई बातों को भी ख़ूब जानता है। (23) (आसान तर्जुमतुल क़ुरआन)